Tuesday, 7 June 2022
उपन्यास सम्राट प्रेमचंद
Sunday, 8 May 2022
Happy Mothers Day
हमारे हर मर्ज की दावा होती है माँ,
कभी डाट ती है हमे तो कभी गले लगा लेती है माँ|
हमारी आँखों के अंशु अपनी आँखों में समां लेती है माँ
अपने होठो की हंसी हम पर लुटा देती है माँ,
हमारी खुशियों में शामिल होकर अपने गम भुला देती है माँ|
जब भी कभी ठोकर लगे हमे याद आती है माँ,
दुनिया की तपिश में हमे अंचल की शीतल छाया देती है माँ|
खुद चाहे कितनी भी थकी हो हमे देख कर अपनी थकान भुला देती है माँ,
प्यार भरे हाथो से हमेशा हमारी थकान मिटा देती है माँ|
बात जब भी हो लज़ीज़ खाने की तो हमे याद आती है माँ,
रिस्तो को खूबसूरती से निभाहना सिखाती है माँ|
लफ्ज़ो मे जिसे बयां नहीं किया जा सके ऐसी होती है माँ,
भगवान भी जिसकी ममता के आगे छुक जाये ऐसी होती है माँ|
Wednesday, 4 May 2022
कक्षा छठी व्यक्तिगत गतिविधि
जय राष्ट्रीय निशान हम अपने देश की राष्ट्रीय पक्षी पशु, फल, फूल, पेड़, नारा, खेल, आदि के विषय में तो जानते ही हैं किंतु हम जिसे अत्यंत आन बान शान से धारण करते हैं, वह है-हमारा राष्ट्रध्वज इस देश के मेरुदंड को थाम कर हमारी कुछ कामनाए होती है ।वैसे तो हम जानते ही हैं राष्ट्रीय चिन्ह एक प्रतीक या मुहर है जिसे किसी राष्ट्र या बहु-राष्ट्रीय राज्य द्वारा अपने प्रतीक के रूप में उपयोग के लिए आरक्षित किया जाता है। इस चिन्ह का प्रयोग सरकारी कागजों ,दस्तावेजों, अभिलेखों, प्रपत्रों , मुद्रा आदि पर किया जाता है। विद्यार्थी जय राष्ट्रीय निशान से देशभक्ति की प्रेरणा, भारतीय होने पर गर्व , तिरंगें को सलामी जैसे गुणों का ज्ञान अर्जित कर पाएंगे
कक्षा आठवीं गतिविधि
दिनांक २९/०४/२२
कक्षा आठवीं गतिविधि
सूक्तियां ( 'पर द्रव्येषु लोष्ठवत')
सूक्तियां हमारी मानसिकता वह हमारे शुद्ध विचारों का शुद्र निर्माण करने में सहयोग करती है। जिनके अनुसरण से जीवन को सरलता से जिया जा सकता है यह जीवन के सुहद मित्र की भांति सभी का पथ प्रदर्शन करती है। सूक्तियां वचन ज्ञान का सार होते हैं अर्थात सुंदर युक्तियां कथन चमत्कार पूर्ण वाक्य छुट्टियों में गुढ़ अर्थ छुपा होता है। इनके द्वारा छात्र कम शब्दों में बेहतर से बेहतर ज्ञान अर्जित करेंगे छात्रों को विद्वानों महापुरुषों नीतियों के अनुभव और परिपक्व विचारों का समावेश सूक्तियां में देखने को मिलेगा।
Friday, 29 April 2022
व्यक्तिगत- गतिविधि - कक्षा- सातवीं
दिनांक
२७/०४/२२ कक्षा- सातवीं
व्यक्तिगत- गतिविधि
मधुर ध्वनियों या स्वरों का विशिष्ट नियमों के अनुसार लय में होने वाला प्रस्फूटन (जैसे-कठ्य, संगीत वाद्य संगीत) सुव्यवस्थित ध्वनि जो रस की सृष्टि करें, संगीत कहलाती है। गायन वादन व नृत्य तीनों में के समावेश को संगीत कहते हैं।
संगीत के प्रति गहन रुचि सीखने की उत्कट लगन ,सतत अभ्यास ,पारस्परिक लगाव तथा गलती को स्वीकारना आदि। प्रस्तुत पाठ में सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर हमें स्वयं अपने बचपन और शैतानियों से परिचित करवा रही है। जिससे छात्र शास्त्रीय संगीत, राग पूरिया, धनश्री राग खबांवती आदि के विषय में जानकारी हासिल कर पाएंगे। वे सीखेंगे राग पूरिया, धनाश्री, आरोह अवरोह का परिचय तथा भारतीय शास्त्रीय संगीत या मार्ग भारतीय संगीत का अभिन्न अंग है शास्त्रीय संगीत ही क्लासिकल म्यूजिक भी कहते हैं शास्त्रीय गायन सुर प्रधान होता है, शब्द प्रधान नहीं इसमें महत्व सुर का होता है अर्थात शास्त्रीय संगीत तात्पर्य पर भारत की प्राचीन गायन, वादन, गीत, नृत्य एवं इन सारी बातों के प्रति जानकारी तथा रुचि अपने अंदर जागृत कर पाएंगे। अच्छा जानेंगे लता जी ने लगभग 30 से ज्यादा भाषाओं में फिल्मी और गैर फिल्मी गाने गाए हैं, उनकी जादुई आवाज के भारत के साथ पूरी दुनिया में दीवानें हैं।
Thursday, 21 April 2022
पृथ्वी दिवस
Earth Day 2022: अर्थ डे यानी पृथ्वी दिवस हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाता है, ताकि पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरूकता फैलाई जा सके और वैश्विक जलवायु संकट को स्वीकार कर सकें। हर गुज़रते साल के साथ, जलवायु खराब होती जा रही है और यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी प्रकृति को बचाने और संरक्षित करने में मदद करें। पृथ्वी दिवस संगठन के अनुसार, पृथ्वी दिवस 2022 का विषय "हमारे ग्रह में निवेश करें" है।
स वर्ष की थीम साहसिक तरीके से अभिनय चलाने, व्यापक रूप से नवाचार करने और न्यायसंगत तरीके से लागू करने पर केंद्रित है।
यह विशेष दिन लोगों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है कि कैसे वे पृथ्वी को प्रदूषण, ग्लोबल वॉर्मिंग, पानी की कमी और अन्य संकटों से बचाने में एक अहम भूमिका निभा सकते हैं।
इस मौके पर स्कूल और कॉलेजों में भी समारोह का आयोजन किया जाता है, जिसमें बच्चे निबंध लेखन और पेंटिंग कॉम्पीटिशन में भाग लेते हैं। तो अगर आप भी निबंध लेखन या भाषण प्रतियोगिता में भाग लेने जा रहे हैं, तो हम आपके लिए लाए हैं कुछ आइडियाज़ जो आपके काम आ सकते हैं।
पृथ्वी दिवस का इतिहास
साल 1969 में पहली बार विश्व पृथ्वी दिवस मनाने का आइडिया प्रस्तुत किया गया और पहली बार इसे वर्ष 1970 में 22 अप्रैल मनाया गया। यानी पहला अंतर्राष्ट्रीय अर्थ डे 1970 में मनाया गया। इस दिन की शुरुआत का भी एक घटनाक्रम रहा है। 1969 में केलिफोर्निया के पास ही एक बड़ा तेल रिसाव हुआ, इस घटना से परेशान होकर नेल्सन ने राष्ट्रीय मुद्दे के रूप में लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए प्रयास शुरू किए।
संकल्पात्मक विकास
रॉन कोब ने एक पारिस्थितिक प्रतीक का निर्माण किया, जिसे बाद में पृथ्वी दिवस के प्रतीक के रूप में अपनाया गया और लोस एंजिल्स फ्री प्रेस में 7 नवंबर 1969 को प्रकाशित किया गया और फिर इसे सार्वजनिक डोमेन में रखा गया। यह प्रतीक "E" व "O" अक्षरों के संयोजन से बनाया गया था जिन्हें क्रमशः "Environment" व "Organism" शब्दों से लिया गया था। यह थीटा चिन्ह जो इसके समान है, का उपयोग पूरे इतिहास में एक चेतावनी के रूप किया जाता रहा है।लुक मैगजीन ने अपने 21 April 1970 के अंक में एक ध्वज में इस प्रतीक को प्रस्तुत किया।
इस ध्वज का प्रतिरूप संयुक्त राज्य के ध्वज के प्रतिरूप से लिया गया था और इसमें एक बाद एक तेरह हरी और सफ़ेद पट्टियां थीं।
इसका केंटन पारिस्थितिक प्रतीक के साथ हरा था जहां तारे संयुक्त राज्य के ध्वज में थे।
विज्ञापन मुद्रण लेखक जुलियन केनिग 1969 में नेल्सन की संगठन समिति में सीनेटर थे और उन्होंने इस घटना को "पृथ्वी दिवस" नाम दिया।
इस नए आन्दोलन को मनाने के लिए 22 अप्रैल का दिन चुना गया, जब केनिग का जन्मदिन भी होता है।
उन्होंने कहा कि किल "अर्थ डे" "बर्थ डे" के साथ ताल मिलाता है, इसलिए यह विचार उन्हें आसानी से आया।
30 नवम्बर 1969 को न्यूयार्क टाइम्स में, सामने के पेज पर, एक लम्बे लेख में, ग्लेडविन हिल ने लिखा
"पर्यावरण संकट" की बढती चिंता राष्ट्रों को प्रभावित कर रही है, जो छात्रों को वियतनाम में युद्ध में भाग लेने के लिए प्रेरित कर रही है।..पर्यावरण की समस्या के प्रेक्षण का एक राष्ट्रीय दिन, जो वियतनाम में सामूहिक प्रदर्शन के समान है, अगले वसंत के लिए इसकी योजना बनायी जा रही है, जब सीनेटर जेराल्ड नेल्सन के कार्यालय से समन्वित राष्ट्रव्यापी पर्यावरणी 'शिक्षण' का आयोजन किया जायेगा.
सेनेटर नेल्सन ने इस घटना में राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय के लिए डेनिस हायेस को भी नियुक्त किया।
Saturday, 15 January 2022
मकर संक्रांति
दान पुण्य के त्योहार मकर संक्रांति (Makar Sankranti) का सनातन धर्म में खास महत्व है. हिंदू धर्म में इस त्योहार को 14 जनवरी दिन शुक्रवार को धूम धाम से मनाया जा रहा है. मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में चलते हैं. यही कारण है कि सूर्य की मकर संक्रांति कहा जाता है. खास बात ये भी है कि इसी दिन खरमास (Kharmas) का समापन हो जाता है और शुभ कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं. तो से में आइए जानते हैं
मकर संक्रांति (Makar Sankranti Special) पर गंगा स्नान और दान पुण्य करने के विशेष महत्व के बारे में सभी कुछ.
जानिए क्या है स्नान और दान का महत्व?
सनातम धर्म की मान्या के अनुसार मकर संक्रांति के दिन ही राजा भागीरथ के तप से गंगा प्रभावित होकर उनके पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम पहुंच गई थीं और फिर वहां पहुंचकर सोते हुए समुद्र में जाकर वह मिली थीं. इसी दिन राजा भागीरथ ने गंगा के पावन जल से अपने पूर्वजों को प्रप्त किया था. मान्यता है कि यही कारण है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा में स्नान करने का सबसे ज्यादा फलदायी फलदायी माना गया है. कहते हैं कि अगर इस दिन गंगा में स्नान करते हैं तो सभी प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं और सीधा प्रभु के चरणों में शरण मिलती है. अगर आप गंगा में स्नान नहीं कर पाते हैं तो घर पर भी इस दिन स्नान करने का अति महत्व है.
मकर संक्रांति 2022 शुभ मुहूर्त
मकर संक्रांति का क्षण या सूर्य का मकर राशि में प्रवेश: दोपहर 02 बजकर 43 मिनट पर मकर संक्रांति का पुण्य काल: दोपहर 02 बजकर 43 मिनट से लेकर शाम 05 बजकर 45 मिनट तक मकर संक्रान्ति महा पुण्य काल: दोपहर 02 बजकर 43 मिनट से शाम 04 बजकर 28 मिनट तक.
ऐसे करें संक्रांति के दिन पूजा
कहा जाता है कि इस दिन सूर्यदेव की आराधना किया जाना सबसे ज्यादा फलदायी होता है. यही कारण है कि इस दिन सूर्य देव को जल, अक्षत, गेहूं, गुड़, लाल वस्त्र, तांबा, सुपारी, लाल फूल और दक्षिणा आदि से पूज जाता है. सूर्य पूजा के बाद ही इस दिन क्षमता के अनुसार किसी जरुतमंद को दान करना चाहिए. दान पुण्य के समय तक व्रत रखा जाता है, और दान के बाद ही व्रत को खोला जाता है.
इन नामों से प्रचलित है मकर संक्रांति
देश के अलग अलग हिस्सों में मकर संक्रांति को अलग अलग नाम से मनाया जाता है. दक्षिण भारत में पोंगल, गुजरात और राजस्थान में इसे उत्तरायण कहा जाता है और कई राज्यों में पतंग उड़ाने का भी इस दिन खास महत्व होता है. हरियाणा और पंजाब में इस त्योहार को माघी और उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश इस दिन खिचड़ी कहा जाता है.
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